#नीम का थाना से विधायक कोन बनेगा#प्रेम सिंह बाजोर ही क्यों चुनु।#सबसे बढ़िया नेता नीम का थाना#सबसे पॉपुलर व्यक्ती नीम का थाना#सबसे अच्छा राजनीतिक व्यक्ती भारत#राजस्थान का भामासाह#best mla Rajsthan#Prem Singh bajor
नेता नहीं सेेेवक।
जो जनता की सेवा के लिए लड़ता है। लूट के लिए नहिं , जो जनता का दुख दर्द समझे वही नेता है, अगर आप में जवाब देने की महा अक्षमता हो और आप माफ कर दें तो ये भी महानता होगी प्रेम सिंह जी ने हमेशा काम को महत्व दीया है पिछले दिनों किसानो के नाम पर कुछ लोगों ने उनके साथ बद सुलुकी की कार्यकर्ताओं में आज भी उसका भारी रोस है और समय आने पे वो जवाब भी देगें। लेकिन प्रेम सिंह जी से जब पूछा जाता है तो अकसर यही कहते हैं हम सेवक लोग हैं जो गलत रास्ता चुनते हैं उनके ऊपर ऊपर वाले की नज़र है ये सही भी है। कार्यकर्ताओं का टक्कराव कराने से क्या होगा। लोकतन्त्र में खून खराबा कायर और मूर्खों का काम है।। जो लोग किसी पे कीचड़ उछाला कर परसिद्धि पाना चाहते हैं। या समाज के सेवकों पर हमला करा कर राजनीतिक लाभ पाना चा ह ते हैं उस को आम जन निगाह में रखता है। राम जी ने कष्ट झेले क्या कभी जनता की अनदेखी की परिवार तक को छोड़ दिया। हम तो आम आदमी हैं इस तरह के विचार होते हैं। सच बात है की भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में अहिंसा वादी और दिल से समाज सेवा करने वाले बाजोर जी जैसे बहुत कम लोग हैं। प्रेम सिंह जी वो चेहरा हैं जो दिलो जान से अपने कार्यकर्ता को चाहते हैं।बल्कि सेवा के लिए ही राजनिति में आये और जब जरूरत पडी दिल खोल के दान भी देते है।
प्रेम सिंह बाजोर ही क्यों:_
पिछली योजनाओं में बहुत से काम बाकी रह गए जिसपे लूट खसोट वाली राज्य सरकार ध्यान नहीं देंगी। जबकि प्रेम सिंह जी समाज हित में सेवार्थ अपनी संचित पूंजी लुटाने से भी कभी नहीं हिचकिचाते ये सर्व ज्ञात है। सीकर और नीम का थाना ही नहीं राजस्थान की अनेक समस्याएं हैं जो बाजोर जी की नजर में हैं। वो इस बार काम खींचना चा ह ते थे लेकिन इस बार अवसर नहीं मिला लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। अपने एजेंडे का वो ज्यादा प्रचार भी नहीं करते क्योंकी उनका मानना है अगर ईमानदारी से काम करेंगे और विकास करेगें तो जनता अपने आप वोट करती है । हालांकी जमाना आजकल बनावटी प्रचार का है। जिससे बाजोर जी अकसर बचते हैं।
उनकी महान सोच
इंसान से बड़ा पैसा नहीं ।
जीवन का जितना समय सेवा में जाए वो बेहतर।
मेहनत के बीना कुछ संभव नहीं।
फालतू का दिखावा समय की बरबादी है।
समाज में जब चरित्र रंगीन होते जा रहे हों तो आदर्श कोन बने ? निश्चय ही जो देस के लिए मर मिटा हो वो।
शहीदों को याद किया जाना किसी देस के लिए जरुरी है वो सद्प्रेरणा होते हैं समाज के लिए। इस बात को बाजोर जी ने समझा। और उनका सफर सुरू हुआ खुद खर्च से अमर शहिदो की प्रतिमा लगाने का। क्योंकी उनकी (सहिदों की) मूर्तियां लगाने से अमर सहिदाें की बहादुरी और बलीदान को वर्षों तक याद किया जाएगा और आने वाली पीढ़ी जब तसवीर देखेगी ,मूर्तियां निहारेगी तो उनमें भी ब हा दु री देस प्रेम के भाव जगेंगे। ऐसा ही सायद श्री मान बाजोर जी का मानना है।
: प्रेम सिंह बाजोर जी फैन क्लब