प्रेम सिंह है नाम मेरा।।


प्रेम सिंह है नाम मेरा, मैं विजय ध्वज फहराता हूँ।
मुरझाए चेहरोन पे मैं फुले कमल खिलाता हूँ।

बाजोर का सिपाही हूँ, जन जन पे वारा जाऊंगा।
मिट्टी होजायेगी रूह मेरी, तो मरु धरा मेहकाउंगा।
मिल कर कण कण में इसके मेरी लगन वही, दोहराऊंगा, 
सेवा हेतु सांस जाएगी तोभी लौट के वापिस आऊंगा।

हर रूह पे क्यो न छाउँगा ,मेरा पर्ण वही दोहराऊंगा
सेवा के लिए मैं जन्मा हूं, उसी भाव में प्राण गवाऊंगा,
इस छेत्र के चरण ही मेरा स्वर्ग,निसदिनसीसझुकाउंगा
मेरे दिल मे उतरे हैं ये सब, इन अपनो पे मरमिट जाऊंगा।

मुझे प्रेम है मेरे मरु वासी इस छेत्र के प्यारेलालों से
मेरी माता मेरी बहन बुजुर्गों के आसिसों के प्यालों से,
मजदूरों की मजदूरी, किसानों के खेत की पालों से ,
मैं वाकिफ हूँ मेरे छेत्र के गरीब नवाज के हालोन से,
सुनो मेरे प्यारे साथियो में फिर से रोशनी लाऊंगा,
सेवा भाव से उठा लिया ये ध्वज पुनः लहरूँगा,
मुरझाए चेहरों पे फिर से मुस्कुराहट लौटाऊंगा।

ले जाऊंगा इस बार छेत्र को उठा नई बुलंदी में,
बदलूंगा हालात जोश से महामारी की मंदी में,
मेरी इच्छा है हर गरीब के घर जले रोजाना चूल्हा,
कोई हाथ बिना काम न रहे कमाएं खुलम खुला
मेरी इच्छा है आकाश में बन के बादल पानी लाऊंगा
प्यासी भूमि पर इस बार सावन बन बरसाउंगा

इस बार सोंच दौड़ाई है मैं हाल बदल के रख दूँगा
मेरी टूट जाये चाहे सांस विकास की चाल बदल के रख दूँगा,
झूट कपट की टहनी जड़ और डाल बदल के रख दूँगा
इतनी सेवा करूँगा आपका ख्याल बदल के रख दूँगा।

प्रेम सिंह है नाम मेरा मैं विजय ध्वज फहराता हूँ।
मुरझाए चेहरों पे मैं फुले कमल खिलाता हूँ।


**कवि-विकास तंवर खेड़ी Mb-9812073306

(एक जन नेता के ह्रदय की भावनाओं को दर्षाती कविता)

#प्रेम सिंह बाजोर;

#prem singh bajor

#bajor ji poem

#प्रेम सिंह है नाम मेरा

#प्रेमसिंघबजोर

#premsinghbajor


Popular posts from this blog

शेरों के शेर बाजोर जी

प्रेम सिंह बाजोर जी द्वारा किये गए प्रमुख कार्य।